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शनिवार, 29 जून 2024

जीवन

 प्रत्येक बीज जैसे उपज नही पाता है 

वैसे हर सीप से क्या भाग्य, मोती पाता है


प्रयत्न कभी सफल कभी असफल हो जाता हैं

धीर पुरुष क्या मुंह छुपाता है


कर्म की क्या कोई चाल समझ पाता है 

कौन है ऐसा जो सदा सुख पाता है


गहरा हो घाव वो भी भर जाता है

समय जब मरहम लगाता है 


प्रत्येक बीज जैसे उपज नही पाता है 

वैसे हर सीप से क्या भाग्य, मोती पाता है

SANJAY KUMAR RATHI


नैतिकता

 कर दूं कैसे समर्पण ,अनैतिकता के ठाठो को

कैसे जाऊं भूल ,नैतिकता के पाठो को


ज्ञान होकर भी अज्ञानी ,अपने हितों को साध रहे 

पीस रहे हैं बैल कोल्हू के, जीवन में ना स्वाद रहे


ना प्रेम रहा 

ना विचार रहे 

बस मौन होकर ,अत्याचार सहे


सद्भावना की आड़ में ,जाने कितनी सड़ांध बहे 

झूठो की रगों में ,झूठ का ही राग बहे 

उस पर अकड़ इतनी, खुद को कामयाब कहे


ज्ञान होकर भी अज्ञानी, अपने हितों को साध रहे 

पीस रहे हैं बैल कोल्हू के ,जीवन में ना स्वाद रहे


कर दूं कैसे समर्पण ,अनैतिकता के ठाठो को

कैसे जाऊं भूल ,नैतिकता के पाठो को.


   ✍️     SANJAY KUMAR RATHI