मेरे बारे में

बुधवार, 12 जनवरी 2011

दिल्ली


शाखे गुलाब दिल्ली
दिले भुलाव दिल्ली
आज फिर आँखों मे उभरी
तेरी याद दिल्ली
गुलिश्ता है
फ़रिश्ता है
बसती जहन मे
आहिश्ता आहिश्ता है
तेरे रास्ते दिल्ली
जीने के वास्ते दिल्ली
आज भी खुले है
साँसों मे घुले है
बड़ी रुबाब दिल्ली
कामयाब दिल्ली
रंगे गुलाल दिल्ली
ढंगे जुबान दिल्ली
आज भी है जहाँ पर
तेरी कमान दिल्ली
महोबते अरमान दिल्ली
सोह्बते फरमान दिल्ली
आज भी घुमाए है
तेरे खुवाब दिल्ली
शाखे गुलाब दिल्ली
दिले भुलाव दिल्ली
आज फिर आँखों मे उभरी
तेरी याद दिल्ली