मेरे बारे में

रविवार, 18 दिसंबर 2011

बदलाव

गिरगिट सपने वर्ण बदले
उधडे मन कैसे संभले
तलवारों की एक कहानी
म्यान बदले या मैदान बदले
मैंने तो  रंग  फेका है मुठी भर - भर
अब जमी बदले या आसमान बदले 


खारे दरिया पहचान बदले
लड़खड़ाते कदम ईमान बदले
गुफ्तगू तो होगी मेरे रुतबे की कभी
चाहे जाम बदले या पैगाम बदले
मैंने तो ढंग समेटा है  व्योम भर-भर
अब दाम बदले या इल्जाम बदले 

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