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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

एहसास

अम्बर विशाल तडपता है धरती को
रोता है चिघाड़ कर देख कर अपनी शक्ति को
वसुंधरा फिर भी आसुओ को खुद मे समां लेती है
 कहती है बारम्बार
ना मिल सके हम तो क्या है
फिर भी हम ये दिव्य सन्देश देगे 
 देख लेना छितिज  पर ना मिल कर भी
 हम मिल जाते है
कितनी भी कोशिश कर ले दुनिया
फिर भी हम एक नज़र आते है 
मिलाता है इन्द्रधनुष जमी आकाश को
मरने ना देगे हम प्यार के एहसास को