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गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

पीड़ा

अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज

सोने की नगरी चाँदी के गाव जन्नत भी छोटी बड़ा अलगाव
रेशम का बिस्तर तारो की छाव मधु का प्याला भरे ना घाव
यादो के तीर भरे विषाद अश्को से निकले फरियाद

अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज

सपनो  का धुँआ  जहन  बंजर
रोज दिल  काटे नयन खंजर
कैसे भरे अब इस बुत मे प्राण
जलाए रूह या जलाए निशान
अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज