मेरे बारे में

बुधवार, 23 फ़रवरी 2011

प्यास

रिवाजो की सुलीया चढ़े क्यों रात दिन
वसूलो की बेड़िया पड़े क्यों रात दिन

मुश्किल भरे मटके सर पर ढोए भरी दुपेहरी
वो जाए कहा जिसको घर भी लगे कचेहरी

जन्नत है आंखे तो क्यों गम भर आए
क्यों करे इंतज़ार उसका जो उम्र भर ना आए

मुद्दत से बस एक पल खोजे दिल
जाने दबा है किसके बोझे दिल

जरूरतों का पहाड़ खोद कर कहा जाए
ऐसा ना हो कही ये पल भी बह जाए

समेटे कैसे बाँहों मे दुनिया सारी
जो कल थी प्यास मेरी वो आज है तुम्हारी 

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

गुजारिश

बीते लम्हों की गुजारिश जाने क्या कह जाती है
तेरी हर एक आह नजरो से बह जाती है
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सहेजा है दिल मे जाने कितने तुफानो को
मसला है ना जाने कितने अरमानो को

बहता है दरिया मेरी चोखट पर
फिर क्यों जाऊ दूर नहाने को

उठा कर हाथ आकाश छुने दो
मैंने कब कहा तारे नाप लाने को

खुशबू बहुत है गुलिश्ता मे तेरे
कभी आओ मेरे घर भी शकर खाने को

कट तो जाता है दिन बिन तेरे
फिर क्यों आता है चाँद दिल जलाने को

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

राहे

चौराहे जिंदिगी के हर मौड़ पे खड़े है
बहुत है भीड़ वहा जहा कदम पड़े है
गिर तो जाता कब का
मगर क्या करू होसले बड़े है
बस यही अरमा
अब दिल में चढ़े है
चलते ही जाना
कदम बढे तो कदम बढे है
कहो तो कहो
मधहोश मुझे
ये सरुर जब चढ़े है
तो बस चढ़े  है
रोकेगा कौन रफ़्तार तेरी
जब रास्ते तुने खुद ही जड़े है
खोल कर तो देख
राहे तेरी
चलने से पहले मंजिल पड़े है