मेरे बारे में

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

मोरे पिया

मन बदला
मन बदल गया
मोरे पिया तू क्यों छल गया
राते काली कटती ना थी
तू दिन भी काले कर गया

मन बदला
मन बदल गया
मोरे पिया, तू क्यों छल गया
किसको तकेगे, अब ये नैना
सुनी थी राहे, तू दिल भी सूना कर गया

मन बदला
मन बदल गया........

बद्लेगे लोग, बदलेगा मौसम
मै कैसे बदलू,  तू चोराहे पे धर गया
मन बदला
मन बदल गया
मोरे पिया, तू क्यों छल गया




पीड़ा

अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज

सोने की नगरी चाँदी के गाव जन्नत भी छोटी बड़ा अलगाव
रेशम का बिस्तर तारो की छाव मधु का प्याला भरे ना घाव
यादो के तीर भरे विषाद अश्को से निकले फरियाद

अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज

सपनो  का धुँआ  जहन  बंजर
रोज दिल  काटे नयन खंजर
कैसे भरे अब इस बुत मे प्राण
जलाए रूह या जलाए निशान
अब ना मिटेगी ये पीड़ा इश्क तेरा क्या इलाज

एहसास

अम्बर विशाल तडपता है धरती को
रोता है चिघाड़ कर देख कर अपनी शक्ति को
वसुंधरा फिर भी आसुओ को खुद मे समां लेती है
 कहती है बारम्बार
ना मिल सके हम तो क्या है
फिर भी हम ये दिव्य सन्देश देगे 
 देख लेना छितिज  पर ना मिल कर भी
 हम मिल जाते है
कितनी भी कोशिश कर ले दुनिया
फिर भी हम एक नज़र आते है 
मिलाता है इन्द्रधनुष जमी आकाश को
मरने ना देगे हम प्यार के एहसास को

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

रूठना

रूठना तो महोबत की अदा पुरानी है सनम
कुछ ना कहूँगा मै
यही खता निभानी है सनम
जिक्र ना करूँगा तेरा फूलो से भी कभी
मुझको काटो से वफ़ा निभानी है सनम
बस जाओ तुम गैरो की बाहों मे तो क्या
मुझको तो ख्वाबो की दुनिया सजानी है सनम 


रविवार, 18 दिसंबर 2011

बदलाव

गिरगिट सपने वर्ण बदले
उधडे मन कैसे संभले
तलवारों की एक कहानी
म्यान बदले या मैदान बदले
मैंने तो  रंग  फेका है मुठी भर - भर
अब जमी बदले या आसमान बदले 


खारे दरिया पहचान बदले
लड़खड़ाते कदम ईमान बदले
गुफ्तगू तो होगी मेरे रुतबे की कभी
चाहे जाम बदले या पैगाम बदले
मैंने तो ढंग समेटा है  व्योम भर-भर
अब दाम बदले या इल्जाम बदले 

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