मेरे बारे में

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

गुजारिश

बीते लम्हों की गुजारिश जाने क्या कह जाती है
तेरी हर एक आह नजरो से बह जाती है
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सहेजा है दिल मे जाने कितने तुफानो को
मसला है ना जाने कितने अरमानो को

बहता है दरिया मेरी चोखट पर
फिर क्यों जाऊ दूर नहाने को

उठा कर हाथ आकाश छुने दो
मैंने कब कहा तारे नाप लाने को

खुशबू बहुत है गुलिश्ता मे तेरे
कभी आओ मेरे घर भी शकर खाने को

कट तो जाता है दिन बिन तेरे
फिर क्यों आता है चाँद दिल जलाने को