प्याज के नखरे बड़े
अनाज सड़े पड़े पड़े
अर्थववस्था सुधर रही है
आम जनता चाहे रोज मरे
खेतो मै ना खाद है
नक्सलवाद की आग है
आरक्षण का फसाद है
साक्षरता बढ़ रही है
क्रांति का जौर है
तरक्की का शौर है
लिंग अनुपात है सही
कोख चाहे रोज उजड़े
सच का टोटा है
लुटरो का कोठा है
इमारते बुलंद है
संसद के गुमंद है
अनाज सड़े पड़े पड़े
अर्थववस्था सुधर रही है
आम जनता चाहे रोज मरे
खेतो मै ना खाद है
नक्सलवाद की आग है
आरक्षण का फसाद है
साक्षरता बढ़ रही है
क्रांति का जौर है
तरक्की का शौर है
लिंग अनुपात है सही
कोख चाहे रोज उजड़े
सच का टोटा है
लुटरो का कोठा है
इमारते बुलंद है
संसद के गुमंद है