क्यों लेती हो नाम मेरा , दिल बहलाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को
क्यों धोती हो हाथ मेरे , दाग छुढाने को
क्यों फेलाती हो दामन, सर छुपाने को
गफलत मे जीने दो , जिंदिगी चार दिन
कभी तो बद्लेगे, बेजार दिन
छुती हो दिल क्यों , जख्म मचलाने को
क्यों आती हो पास मेरे , खुद को जलाने को
ताबूत की कीलो से , आशियाँ न बनाओ
मुश्किल में मेरी , खुद को ना मिलाओ
क्यों जाती हो दर- दर , ठोकरे खाने को
क्यों थामती हो मुझको , किश्मत आजमाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को
क्यों धोती हो हाथ मेरे , दाग छुढाने को
क्यों बुनती हो बूंदों को सागर पाने को
क्यों खोदती हो मुझको , खुद में समा जाने को
क्यों फेलाती हो दामन, सर छुपाने को
क्यों लेती हो नाम मेरा , दिल बहलाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को
क्यों धोती हो हाथ मेरे , दाग छुढाने को
क्यों फेलाती हो दामन, सर छुपाने को
गफलत मे जीने दो , जिंदिगी चार दिन
कभी तो बद्लेगे, बेजार दिन
छुती हो दिल क्यों , जख्म मचलाने को
क्यों आती हो पास मेरे , खुद को जलाने को
ताबूत की कीलो से , आशियाँ न बनाओ
मुश्किल में मेरी , खुद को ना मिलाओ
क्यों जाती हो दर- दर , ठोकरे खाने को
क्यों थामती हो मुझको , किश्मत आजमाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को
क्यों धोती हो हाथ मेरे , दाग छुढाने को
क्यों बुनती हो बूंदों को सागर पाने को
क्यों खोदती हो मुझको , खुद में समा जाने को
क्यों फेलाती हो दामन, सर छुपाने को
क्यों लेती हो नाम मेरा , दिल बहलाने को
क्यों चलती हो काटो पे , अरमान जलाने को