चाहत
चाहता हूँ बाँधना , दारिया तेरी लहरों को
चाहता हूँ पीना , समय तेरे पहरों को
और कर लेने चाहता हूँ , जब्त खुद में
खुदा तेरे कहरो को
चाहता हूँ खिलाना , मायुस चेहरो को
चाहता हूँ मिलाना , मानसिकता के दायेरो को
और कर लेने चाहता हूँ , जब्त खुद में
खुदा तेरे जहरो को
Sanjay Kumar Rathi