दिल की आवाज़
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Sanjay Kumar Rathi
New Delhi, Delhi, India
Hindi Shayari
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बुधवार, 12 जनवरी 2011
क्यों
अभी तो रोंदे थे सपने
फिर क्यों आस भरी है
अभी तो तोडा था घरोंदा
फिर क्यों भीड़ खडी है
अभी तो छोड़ी थी रस्मे
फिर क्यों मांग भरी है
अभी तो बोला था पत्थर
फिर क्यों आह भरी है
अभी तो काटे थे पंख
फिर क्यों उडान भरी है
Sanjay Kumar Rathi
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