समर्पण के प्रमाण मे
प्रण की छाव मिले
तपते मन मे आज भी
अलाव मिले
कर तो लु मै बुत परस्ती
कही तो कोई राम मिले
इंसानियत का कही जमाव मिले
जो कर दे पार ऐसी नाव मिले
थकते तन को आज भी
सवाल मिले
कर तो लु मै बुत परस्ती
कही तो कोई राम मिले
प्रण की छाव मिले
तपते मन मे आज भी
अलाव मिले
कर तो लु मै बुत परस्ती
कही तो कोई राम मिले
इंसानियत का कही जमाव मिले
जो कर दे पार ऐसी नाव मिले
थकते तन को आज भी
सवाल मिले
कर तो लु मै बुत परस्ती
कही तो कोई राम मिले