दिल की आवाज़
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Sanjay Kumar Rathi
New Delhi, Delhi, India
Hindi Shayari
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रविवार, 16 जनवरी 2011
ख़ाक
दावते इमान उड़ाई रात भर
चिलम पे चिलम जलाई रात भर
मुझको क्या मालूम
मेरी मदहोशी का आलम
खुद की ही ख़ाक उड़ाई रात भर
Sanjay Kumar Rathi
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