मेरे बारे में

बुधवार, 12 जनवरी 2011

भेढ़ो की खाल


ढाक के पात से,
सपने की खाट से
रोज निकलता हूँ दीमक,अपने जज्बात से
लोटे की पैदी को,मन के छेदी को
रोज सुनाता हूँ यादे,घर के भेदी को
जात के सवाल पर,घात के झामाल पर
जाने कैसे कर लेता हूँ भरोसा ,भेढ़ो की खाल पर
लोहे के चने को,शीशे के तने को
रोज बहाता हूँ नैनो से
दर्दे घनो को