मेरे बारे में

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

चुनाव

बुना है बूंदों को सागर पाने को
चुना है जुगनुओ को गगन जगमगाने को
तराशा है  होसलो को बुलंद हो जाने को
रखा है कदम छा जाने को
खोजा है खुद को समर्थन पाने को
चुनी है राह अनुसरण कराने  को
नापा है कद विकराल हो जाने को
पिया है जहर अमर हो जाने को
छेड़ी है ताल गुनगुनाने को
उतरा हूँ मैदान मे जीत जाने को
बुना है बूंदों को सागर पाने को
चुना है जुगनुओ को गगन जगमगाने को