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शनिवार, 29 जून 2024

जीवन

 प्रत्येक बीज जैसे उपज नही पाता है 

वैसे हर सीप से क्या भाग्य, मोती पाता है


प्रयत्न कभी सफल कभी असफल हो जाता हैं

धीर पुरुष क्या मुंह छुपाता है


कर्म की क्या कोई चाल समझ पाता है 

कौन है ऐसा जो सदा सुख पाता है


गहरा हो घाव वो भी भर जाता है

समय जब मरहम लगाता है 


प्रत्येक बीज जैसे उपज नही पाता है 

वैसे हर सीप से क्या भाग्य, मोती पाता है

SANJAY KUMAR RATHI