मुझको तो दिखा ना कोई जो हो हरि की भांति
हिरण्यकश्यपो को भगवान मानकर पूज रही असुर प्रजाति
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पसार कर हाथ खड़े है,खड़े हैं बेच कर ज़मीर
सोने की हैं , तो क्या, हैं तो जंजीर
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उनका क्या खुलेगा खून,उनकी क्या ज़वानी
जिन को नहीं दिखती बेड़ियां,बस दिखता दाना पानी
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आंख बनो , कान बनो , बनो हाथ पैर
जिस दिन बने दिमाग , उस दिन नहीं खैर
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बेच कर ईमान पाप कमा रहे हो ?
बोझ भारी बड़ा कैसे उठा रहे हो ?