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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

मन बंधन

मन बंधन के तोड़ दे ताले
जाने किस ताल खिले उजाले
चल गर्दिश को दे भुला
थोडा  होश तो
संभाले ...

चलती नाव मे कील क्यों ठोके

जब दिखने लगे किनारे
चल रातो मे रंग भर दे
फूलो मे भरे उजाले....

जाने किस के मन  मे क्या है

किस से अब क्या मांगे
चल थोडा सा शर्बत बाटे
खोले बंदिश के धागे..

मन बंधन के तोड़ दे ताले
जाने किस ताल खिले उजाले...
**Sanjay Kumar Rathi**