हमने कहा तो उग्रवाद
तुमने कहा तो क्रांति
सफ़ेद लिबादे मे बंद है
जाने कितनी भ्रान्ति
मारा गया था जो वो था बेगुनाह
गुनाहगारो के है सियासत्दार सारथी
किसानो के घर अन्न नहीं
चोरो की नोटों से उतरे आरती
अभी कल ही तो लुटी थी उन्होंने इज्जत
जो आज आगे खड़े होकर बोल रहे है
जय भारती जय भारती
**Sanjay Kumar Rathi**