मेरे बारे में

सोमवार, 9 जनवरी 2012

जय भारती

हमने कहा तो उग्रवाद
तुमने कहा तो क्रांति
सफ़ेद लिबादे मे बंद है
जाने कितनी भ्रान्ति

मारा गया था जो वो था बेगुनाह
गुनाहगारो के है सियासत्दार सारथी
किसानो के घर अन्न नहीं
चोरो की नोटों से उतरे आरती

अभी कल ही तो लुटी थी उन्होंने इज्जत
जो आज आगे खड़े होकर बोल रहे है
जय भारती जय भारती
**Sanjay Kumar Rathi**