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गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

हसरत

रह गया क्या जो अब भी मै दौड़ रहा हूँ
ऐ हसरत मेरी मै तुझको छोड़ रहा हूँ

उमंग जागी प्यासे परिंदे की
लगे न नज़र किसी दरिन्दे की

छुने गगन को वो फिर चला
गया था जो बादलो से छला

प्यास है बड़ी सारा जहा पाने की
बारी है फिर से पंखो को नपाने की

दे हिसाब किस को जो इंसाफ करे
चल आज हम एक दूजे को माफ़ करे

ऐ हसरत मेरी मै तुझको छोड़ रहा हूँ
रह गया क्या जो अब भी मै दौड़ रहा हूँ

Sanjay Kumar Rathi