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गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

इश्क की बलाए

इश्क की हाय ये कैसी बलाए
जो चढ़ जाए तो दिल को जलाए
याद सताए कसमसाए तिलमिलाए
अगन ये कैसी जो सब कुछ भुलाए
लगन उसकी खुद मे मिलाए
इश्क की हाय ये कैसी बलाए
जो चढ़ जाए तो दिल को जलाए
रातो को जगाए दिन भर रुलाए
कैसा ये दीवाना बनाए खुद को भुलाए
जग से छुपाए याद सताए
कसमसाए तिलमिलाए लगन उसकी
खुद मे मिलाए अगन ये कैसी
जो सब कुछ भुलाए इश्क की हाय
ये कैसी बलाए जो चढ़ जाए
तो दिल को जलाए