मेरे बारे में

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

युग पुरुष

सपने नए पंख नए उडान वही पुरानी है
मै हूँ युग पुरुष कथा फिर दोहरानी है
शब्दों के असर को फिर जगाना है
मुझको फिर से चिराग नया जलाना है
हिम्मत है
जज्बा है
कदम फिर बढ़ाना है
आज फिर मुझको खुदको हराना है
मुश्किलों ठहर जाओ मुझको चलते जाना है