दिल की आवाज़
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Sanjay Kumar Rathi
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Hindi Shayari
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गुरुवार, 30 दिसंबर 2010
चिराग
जलाया है चिराग लहू से धमनियों की बाँँती है
बस अब यही लगन दिन राती है
उखाड़ दे धरा से नापाक इरादों को
है हिम्मत तो रोके कोई हिंद के शहजादे को
Sanjay Kumar Rathi
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