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नहीं चाहिए वैभव उन जैसा
जिनका बल निर्बल बिन वैभव
नहीं चाहिए तन उन जैसा
जिनका मन कलंकित संग पावक
नहीं चाहिए कीर्ति उन जैसी
जिनका अधर्म रहा सहायक
नहीं चाहिए धर्म उन जैसा
जिनकी सोच रही भयावक.
****SANJAY KUMAR RATHI****