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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

नहीं चाहिए

 नहीं चाहिए वैभव उन जैसा

जिनका बल निर्बल  बिन वैभव


नहीं चाहिए तन उन जैसा

जिनका मन कलंकित संग पावक


 नहीं चाहिए  कीर्ति उन जैसी

जिनका अधर्म रहा सहायक


 नहीं चाहिए धर्म उन जैसा

जिनकी सोच रही भयावक.


****SANJAY KUMAR RATHI****