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बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

पिंजरा

दवा पानी और सुरक्षा पिंजरे की दिवाराे में 

दासाे का जीवन गुज़रा हमेशा तहखानाे में 


कभी जाे टांगा खुटी पर पहुँचे आँसमानाे में 

नज़र टिकी थी फिर भी मुफ़्त के दानाे में 


कैसा क्षितिज कैसे पंख सब से अनजान हुएे

बंद रहे पिजरे में लेकिन फिर भी हम महान हुएे


जद्दोजहद से छुटा पिन्ड चाहे जितने लाचार हुएे

देखमदेखी काँठ का उल्लु सारा बाज़ार हुएे


दवा पानी और सुरक्षा पिंजरे की दिवाराे में 

दासाे का जीवन गुज़रा हमेशा तहखानाे में 


**-** SANJAY KUMAR RATHI **-**