वीरों के भी ,वीर है हम
कभी भाले कभी ,तीर हैं हम
लड़ेंगे कब तक, दम है जब तक
दुश्मन चाकू ,शमशीर है हम
काटो वाली ,जंजीर है हम
पार करेंगे ,घनघोर घटाएं
दुश्मन जैसे ,कच्ची लताएं
कभी भाले ,कभी तीर हैं हम
वीरों के भी ,वीर है हम
काटो वाली ,जंजीर है हम
सर को कटवाए, या के काट के लाए
लड़ेंगे कब तक, दम है जब तक
दुश्मन की लाशों से ,श्मशान पटाए
कभी भाले, कभी तीर हैं हम
वीरों के भी, वीर है हम
****SANJAY KUMAR RATHI****